छठ पूजा कब है । 2023 में छठ पूजा कब है

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हेलो दोस्तों आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से यह बताने वाले हैं कि छठ पूजा कब है, छठ पूजा के नियम, छठ पूजा का महत्व, सामाग्री, 2023 में छठ पूजा किस तारीख को है छठ पूजा क्यों मनाया जाता है इस को मनाने के पीछे क्या कारण है अगर आप भी यह जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।

छठ पूजा कब है

छठ पूजा कब है | chhath pooja kab hai 2023

छठ पूजा का भारत मे विशेष महत्त्व है दीपावली के 6 दिन बाद मनाया जाता है छठ पूजा का पर्व पूरे 4 दिनों तक चलता है इस पर्व को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है इस बार छठ पूजा 17 नवंबर 2023 दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा जबकि इसकी शुरुआत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष चतुर्थी से ही प्रारंभ हो जाता है इस व्रत को मनाना बहुत कठिन होता है क्योंकि यह 36 घंटे निर्जला यानी कि इस व्रत मैं पानी तक नहीं पिया जाता है और पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है छठ पूजा के समय कथा सुनना भी जरूरी होता है क्योंकि बिना कथा के व्रत का कोई फल नहीं मिलता है।

छठ पूजा की कथा

पहली कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार! राजा प्रियंवाद जिसकी कोई संतान नहीं थी! तब महर्षि कश्यप ने पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियंवाद की पत्नी मालिनी को यज्ञ आहुति के लिए बनाई गया था! इससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति तो हुआ लेकिन वह मृत पैदा हुआ! तब वह पुत्र वियोग में अपने प्राण त्यागने लगे! उसी समय भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हो गई! और उन्होंने कहा की सृष्टि के मूल प्रवृत्ति के अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं सृष्टि कहलाती हूं।

राजन तुम मेरी पूजा करो और इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करो! तब राजा ने पुत्र के लिए देवी सती का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हो गई! यह पूजा कार्तिक माह के शुक्ल षष्ठी को हुई थी।

दूसरी कथा

छठ पूजा के एक और कथा के अनुसार जब पांडव अपना संपूर्ण राज पाठ जुए में हार गए थे तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा था और उनकी मनोकामनाएं भी पूरी हुई और पांडवों को उनका सारा राजपाट वापस मिल गया था लोक परंपरा के अनुसार सूर्य देव और छठी मैया का संबंध भाई बहन का है इसलिए छठ के मौके पर सूर्य देव की आराधना बहुत ही फलदाई मानी गई है सूर्य षष्टि व्रत होने के कारण इसे छठ कहा जाता है यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है पहली बार चैत्र माह मैं और दूसरी बार कार्तिक में चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्टि के दिन मनाए जाने वाले छठ को चैती छठ और कार्तिक शुक्ल पक्ष सृष्टि को मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिक की छठ कहा जाता है।

तीसरी कथा

सस्ती पूजा की एक और कथा के अनुसार यह मान्यता है कि लंका पर विजय पाने के बाद राम राज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल सृष्टि के दिन भगवान राम और सीता ने उपवास किया! और फिर सप्तमी को सूर्योदय के समय सूर्य देव की फिर से अनुष्ठान कर आशीर्वाद प्राप्त किया! एक और कथा के अनुसार छठ पूजा की शुरुआत महाभारत के समय से हुई थी।

सूर्यपुत्र कर्ण ने सबसे पहले सूर्य देव की पूजा करने की शुरुआत की थी! सूर्य देव के परम भक्त थे वह प्रतिदिन घंटों तक पानी में खड़े रहकर सूर्य देव की पूजा करते थे! और सूर्य देव की कृपा से ही वह महान योद्धा बने यही परंपरा आज भी छठ पूजा के दिन चली आ रही है।

यह व्रत अपने परिवार की सुख समृद्धि तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है! इस पर्व को महिलाए और पुरुष दोनों सामान्य रूप से मनाते हैं! छठ पूजा का यह त्यौहार 4 दिनो तक चलता है! इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी से लेकर कार्तिक शुक्ल पक्ष सप्तमी तक होता है।

इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति लगातार 36 घंटे तक बिना पानी को ग्रहण किए ही रहता है छठ पर्व बांस से बने टोकरी मिट्टी के बर्तन गन्ने के रस गुड़ चावल और गेहूं से बने प्रसाद और मधुर लोकगीतों से युक्त होकर लोग जीवन की मिठास का प्रचार करते हैं।

यह मुख्य रूप से भारत के बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के क्षेत्रों में मनाया जाता है! सष्ठी को मनाया जाने वाला छठ पूजा सूर्य उपासना का महापर्व है! और इसके साथ ही छठी मैया की भी पूजा की जाती है और उनसे सुख समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद भी मांगा जाता है।

साल 2023 में छठ पूजा कब है

साल 2023 में छठ पूजा कब मनाया जाएगा? पूजा करने की विधि क्या होती है? छठ पूजा करने की सामग्री क्या है? और नहाए खाए कब? व्रत का पारण कब किया जाता है यह सब इस पोस्ट में जानने वाले हैं।

छठ पूजा हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सृष्टि को मनाया जाने वाला महा पर्व है इस पर्व को सूर्य षष्टि के नाम से भी जाना जाता है और यह पर्व दीपावली के 6 दिन बाद मनाया जाता है यह यह पर मुख्य रूप से उत्तर भारत के बिहार झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है छठ पूजा में सूर्य देव और सृष्टि मैया की पूजा की जाती है यह मान्यता है कि छठ पूजा से पुत्र की प्राप्ति होती है और छठ पूजा 4 दिनों तक चलता है।

छठ पूजा का पहला दिन

इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और कार्तिक शुक्ल सप्तमी को इस पर्व का समाप्ति होती है छठ पूजा के पहले दिन नहाए खाए का होता है इस दिन स्नान करने के बाद घर की साफ सफाई की जाती है और मन को तामसिक प्रवृत्ति से बचने के लिए शाकाहारी भोजन किया जाता है।

छठ पूजा का दूसरा दिन

छठ पूजा का दूसरा दिन खरना कहलाता है! और पूरे दिन उपवास रखा जाता है! इस दिन व्रत रखने वाला व्यक्ति चाहे वह महिला हो या पुरुष वह जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करता है! और संध्या के समय गुड़ से बनी हुई और घी लगी हुई रोटी और फलों का सेवन करते हैं! और बाकी लोगों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

छठ पूजा का तीसरा दिन

छठ पूजा के तीसरे दिन संध्या के समय सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है! और शाम को बांस की टोकरी में चकवा चावल के लड्डू सजाया जाता है जिसके बाद प्रति सदस्य परिवार के साथ भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और अर्क देखते समय जल और दूध चढ़ाया जाता है और छठ मैया की पूजा की जाती है और सूर्य देव के उपासना के बाद छठ मैया की गीत गाया जाता है।

छठ पूजा का चौथा दिन

छठ पूजा के चौथे दिन सुबह के समय का आर्ग सूर्यदेव को दिया जाता है इस दिन सुबह सूर्य देव से नदी के घाट पर पहुंचकर उगते हुए सूर्य को आर्ग देते हैं इसके बाद छठ माता से संतान की रक्षा और पूरे परिवार की सुख शांति का वरदान मांगते हैं।

2023 में छठ पूजा कितने तारीख को है

2023 में छठ पूजा 17 नवंबर दिन शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। 

छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा का त्यौहार हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार है इसमें सूर्य भगवान की पूजा की जाती है यह पर्व पूर्वी भारत बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में भी मनाया जाता है यह एक प्राचीन हिंदू वैदिक उत्सव है जो भगवान सूर्य और देवी छठी को समर्पित किया जाता है यह उत्सव 4 दिन तक चलता है जो कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल सप्तमी को समाप्त होता है।

पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने के लिए भगवान सूर्य का धन्यवाद करने के लिए यह पूजा किया जाता है! महिलाएं भहगवां सूर्य और माता छठी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस दिन उपवास रखती हैं! इस दिन सुख समृद्धि और प्रगति की प्राप्ति के लिए भगवान सूर्य की पूजा की जाती है! सूर्य को लौकी के देवता और ऊर्जा और जीवन शक्ति के प्रदाता के रूप में माना जाता है ऐसी मान्यता है कि छठ पर्व पर व्रत करने वाली महिलाओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति अवश्य होती है।

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छठ पूजा का इतिहास

इस पर्व से जुड़ी हुई एक और कहानी प्रसिद्ध है! राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी निसंतान थे! जिस कारण वह हमेशा दुखी रहते थे तब महर्षि कश्यप ने उन्हें पुत्र काम st1 कराने की सलाह दी जब उन्होंने यह यज्ञ किया तब महर्षि कश्यप ने यज्ञ के प्रसाद के रूप में रानी मालिनी को खीर खाने को दिया कुछ समय पश्चात ही राजा और रानी को पुत्र की प्राप्ति हो गई लेकिन उनकी किस्मत इतनी खराब सिल्की वह बच्चा मृत अवस्था में पैदा हुआ राजा जापानी पुत्र का मृत शरीर लेकर शमशान गए और उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देने लगे तब उनके सामने देवसेना यानी छठ देवी वहां पर प्रकट हो गई जिन्हें षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है।

उन्होंने राजा को बताया कि अगर कोई सच्चे मन से उनकी पूजा विधिवत तरीके से करें! तो उस व्यक्ति के मन की इच्छा पूरी हो जाती है! देवी ने राजा को उनकी पूजा करने की सलाह दी इस बात को सुनकर राजा ने देवी सृष्टि की सच्चे मन से पूजा व्रत करके उन्हें प्रसन्न किया! राजा की पूजा से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया! कहते हैं कि राजा ने जिस दिन पूजा की थी वह कार्तिक शुक्ल षष्ठी का दिन था! और उस दिन से ही आज तक इस पूजा की प्रथा चली आ रही है।

छठ पूजा सामग्री

  • केले के पत्ते
  • गन्ने
  • फल केले
  • इलाइची
  • लोंग
  • हल्दी कुमकुम
  • कपूर, सिंदूर
  • हल्दी पौधा सहित
  • एक छोटा दिया
  • एक कटोरी में दूध
  • जल पात्र
  • पूजा के लिए पान के पत्ते
  • कच्चे धागे से बनी एक माला
  • सुपारी
  • अगरबत्ती
  • धूप, मेवा, घंटी, भोग के लिए रोटी
  • चने की दाल
  • खीर, लौकी की सब्जी
  • छठ पूजा की कथा पुस्तक
  • एक थाली में दही, फूल, नारियल और एक चौकी

छठ पूजा के नियम

ज्योतिषी दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण होता है सूर्य के प्रकाश में कई रोगों को नष्ट करने की क्षमता होती है इसके प्रभाव से व्यक्ति को आरोग्य और तेज की प्राप्ति होती है छठ पूजा का व्रत करने वाले व्यक्ति इस पर्व के चारों दिन साफ स्वच्छ कपड़े पहनना चाहिए। बिना हाथ धोये किसी भी समान को न छूए। ब्रत करने वाली महिलाओ को पलंग या चारपाई मे नहीं सोना चाहिए। व्रत के दौरान जमीन पर कपड़ा बिछकर सोना चाहिए  इस व्रत के नियमों के अनुसार व्रत करने वाला व्यक्ति और घर के सदस्य को सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए, पूजा के लिए बांस से बने हुए टोकरी और सूप इस्तेमाल करना चाहिए। 

निष्कर्ष

आज हम इस पोस्ट के माध्यम से यह जाना कि chhath kab hai और यह कब मनाया जाता है इसको बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है 2023 में छठ पूजा कब है छठ पूजा के नियम, छठ पूजा का महत्व, सामाग्री, 2023 में छठ पूजा किस तारीख को है यह सब इस पोस्ट में अच्छी तरह से बताया गया है जिसको पढ़ कर आप अच्छी तरह से समझ गए होंगे यह जानकारी आपको कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें और ऐसे ही जानकारी पाने के लिए सब्सक्राइब जरूर करें।

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